शिर्डी में जो महसूस किया मैं आज उसे दोहराता हूं
जब सुबह की आरती खत्म हुई।
शिर्डी में जो महसूस हुआ, मैं आज उसे दौहराती हूं
शायद तुम समझो आखिर क्यों, मैंसाईं के गुण गाती हूं ।
ओम साईं ओम ,ओम साई ओम ।
ओम साईं ओम ,ओम साई ओम ।
जब सुबह की आरती खत्म हुई ,
और बाबा ने स्नान किया ।(२)
उसे देखके मेरे पाप धुले ,
मैं पापी से इंसान बनी।(२)
ओम साईं ओम ,ओम साईं ओम।
ओम साईं ओम ,ओम साईं ओम।
जब सुबह को साईं चरणों में,
जल दूध की धारा बहने लगी।(२)
बह गई भावना बदले की,
मैंने दुश्मन को भी माफ किया।(२)
ओम साई ओम, ओम साई ओम ।
ओम साई ओम ,ओम साई ओम ।
जब सुबह सवेरे साइको ,
उड़ाई गई नहीं चादर।(२)
मैंने सारे चोले फेंक दिए,
मैंने साईं चोला पहन लिया(२)
ओम साई ओम ,ओम साई ओम ।
ओम साई ओम, ओम साई ओम ।
जब सुबह सवेरे पहनाया ,
साईं को मुकुट पुजारी ने।(२)
मैंने खुद की शान मिटा डाली,
मैं अंदर अंदर मुक्त हुआ।(२)
ओम साई ओम, ओम साई ओम।
ओम साई ओम ,ओम साईं ओम।
जब चारों ओर से बाबा पर,
बाबा पर ,बाबा पर।(२)
फूलों की वर्षा होने लगी ,
जाने क्यों मेरी आंखों से,
असूवन की बरखा होने लगी ।(२)
हैरान था मैं,
हैरान था मैं,
साईं ने मुझे क्या सोचकर मालामाल किया,(२)
मैं क्या-क्या मांगन आया था ,
बिन मांगे क्या-क्या पा बैठा ।ं
ओम साई ओम ,ओम साई ओम।
ओम साई ओम ,ओम साई ओम।
श्रेणी:
साई भजन
स्वर:
शिवानी बंसल जी