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याद मुझको कन्हैया तेरी आई अंखियों से नीर बरसे

Yaad mujhko kanhaiya teri aayi ankhiyon se neer barse

याद मुझको कन्हैया तेरी आई
अखियां से नीर बरसे
याद मुझको कन्हैया तेरी आई अंखियों से नीर बरसे
हो तुने राधा की सुध क्यो भुलाई
अंखियों से नीर बरसे
याद मुझको ए श्याम तेरी आई अंखियों से नीर बरसे।

ब्रज से नाता तोड़ क्यों तुम मुझको तड़पता छोड़ गए जान ले लेगी जान ले लेगी तेरी जुदाई
अंखियों से नीर बरसे
याद मुझको कन्हैया तेरी आई अंखियों से नीर बरसे।

तोड़ दिया है पांव का पायल
अब क्या नाचूं हो गई घायल
तेरी बंसी तो तेरी बंसी तो हो गई पराई अंखियों से नीर बरसे
याद मुझको कन्हैया तेरी आई अंखियों से नीर बरसे।

छोड़ चुकी हूं जाना पनघट
हो गया सुना बन गया मरघट
रुत है पतझड़ की है पतझड़ की मधुबन में आई अंखियों से नीर बरसे। याद मुझको कन्हैया तेरी आई अंखियों से नीर बरसे।
प्रीत किए हो कृष्ण कन्हैया
दिल में बसे हो कृष्ण कन्हैया
देख अंखियों में सूरत समाई
अंखियों से नीर बरसे।
याद मुझको ए शाम तेरी आई अंखियों से नीर बरसे
ओ और तुमने राधा की सुध क्यो भुलाई अंखियों से नीर बरसे।।

श्रेणी:

राधा रानी भजन

स्वर:

शुभी अजमानी जी

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