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म्हारे घर का पितर हाजिर

Mhare ghar ka pitar hazir

म्हारे घर का पितर, हाजिर खड़या है म्हारे साथ जी
सुख-दुख माही आडा आवे,देवे म्हारो साथ जी

रोज सवेरे उठकर में तो, पितरा ने ही ध्यावा
माथे छतर छाया राखो,हरदम या ही मनावा जी

नहाए धोए कर पेन्डे माही, दिवलो रोज जलावा जी
घर को अंधेरों दूर भगाद्यो,या ही अर्जी लगावा जी

पितरा के म्है धोक लगावा,उणका आशीष पावा जी
पितरा के म्है भोग लगाकर, मिल-बांटकर खावा जी

रोग दोष भय बाधा सारी, बे दूर हटावे
रवि कवे नित ठाडी कृपा, पितरजी बरसावे जी

श्रेणी:

पितर भजन

स्वर:

लीला तोषनीवाल

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