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मेंहदी रची थारे हाथा मे, उड रहयो काजल आंख्या मे।

Mehendi rachi thare hatha mau

मेंहदी रची थारे हाथा मे, उड रहयो काजल आंख्या मे।
चुनडी रो रंग सुरंग, म्हारी गौरा माँ।

अरे चांद उग्यो ओ राता में, फूल उग्यो रण बागा मे।
थारो ऐसो सुहाणौ रूप, म्हारी गौरा माँ।
मेंहदी रची थारे हाथा मे।

रूप सुहाणौ जद सु देख्यौ, निंदडली नहीं आंख्या ने।
भूल गई सब कामा ने, याद करू थारे नामा ने।
माया रो झूठो संग, म्हारी गौरा माँ।
मेंहदी रची थारे हाथा मे।

थे कहो तो माता मैं तो, नथणि बन जाऊं।
नथणि बन जाऊं, थारा मुखड़ा पे रम जाऊं।
बोर गूथउ थारे माथा पे, चुड़लो मँगाओ थारे हाथा में।
बण जाऊँ बाजूबंद, म्हारी गौरा माँ।
मेंहदी रची थारे हाथा मे।

थे कहो तो माता मैं तो, पायलड़ी बन जाऊं।
पायलड़ी बन जाऊं, थारा चरणा में रम जाऊं।
फूल बिछउ थारा पावा में, नित नित दर्शन आवा मैं।
नैणा में करलु बंद, म्हारी गौरा माँ।

श्रेणी:

गणगौर गीत

स्वर:

Sarika Bansal (Dimple)

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