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जिस घर में वास हो पितरों का
Jis ghar me vaas ho Pitaron ka
जिस घर में वास हो पितरों का-----२
उस घर की बात निराली है-----२
जिस घर में वास हो पितरों का
उस घर की बात निराली है |
सब देवों से पहले घर में, पितरों की पूजा होती है |
जिस घर में इनका मान रहे, उस घर की सिद्धि होती है |
उस कुल के पेड़ का हर पत्ता-----२ और महक रही डाली डाली |
जिस घर में वास हो------
घर के देवों की महिमा, को हर घर वाले पहचान रहे |
जो भूल चूक हो पितरों की, उनको इनका क्या ध्यान रहे |
उस घर के पा्णी सुख पाते-----२ जिस घर की डोर संभाल रहे |
जिस घर में वास हो-----
पितरों का वास है पेण्डे पर, नित दीपक जलाया जाता है |
उस में जल भरकर नित घंटी, वहाँ चढ़ाया जाता है |
घर रूपी बाग बगीचे के-----२ पितर ही सच्चे माली हैं |
जिस घर में वास हो पितरों का, उस घर की बात निराली है |
श्रेणी:
पितर भजन
स्वर:
Usha Bansal
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