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जब से नजर तेरी पड़ गई है हां सांवरे पतंग मेरी उड़ गई है
Jab Se Patang Meri Udh Gayi Hai Haan Sanvare Patang Meri Udh Gayi Hai
जब से नजर तेरी पढ़ गई है,
हां सँवारे पतंग मेरी उड़ गई है,
पहले मैं उडाता था तो झट कट जाती थी,
जयदा देर आसमान मे टिक नहीं पाती थी,
ठीक नहीं पाती थी हां टिक नहीं पाती थी
जब से ये हाथो तेरे पढ़ गई है,2
हां सँवारे पतंग मेरी उड़ गई है,
नशा तेरे भजनो का कैसा मैं बताऊ,
नींदो में सँवारे मैं गुण तेरे गाउ,
गुण तेरे गांव में गुण तेरे गांव
जब से खुमारी तेरी चढ़ गई है,2
हां सँवारे पतंग मेरी उड़ गई है,2
हर्ष की डोरी बाबा थामे युही रखना,
ढीली मत छोड़ देना कस के पकड़ना,
कसके पकड़ना हां कस के पकड़ना
जब से ये प्रीत तुम से जुड़ गई है2
हां सँवारे पतंग मेरी उड़ गई है,
श्रेणी:
मकर सक्रांति भजन
स्वर:
Sarika Bansal (Dimple)
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