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कुछ पल की जिंदगानी एक रोज सबको जाना।

Kuch pal ki jindgani ek roj sabko jana

कुछ पल की जिंदगानी एक रोज सबको जाना।
बरसों की तू क्यों सोचे ? पल का नहीं ठिकाना।।(X 2)
कुछ पल की जिंदगानी....

मल-मल के तूने अपने तन को है जो निखारा।
इत्रों की खुशबुओं से, महके शरीर सारा।।(X 2)
काया ये साथ होगी...2 ये बात ना भुलाना।
बरसों की...   कुछ पल की जिंदगानी....

मन है हरी का दर्पण, मन में उसे बसा ले,
करके तू कर्म अच्छे, कुछ पुण्य धर्म कमा ले।(X 2)
कर दान और धर्म तू...2,  प्रभु को अगर है पाना।।
बरसों की...   कुछ पल की जिंदगानी....

आएगी वो घड़ी जब, कोई न साथ होगा,
कर्मों का तेरे सारे, इक-इक हिसाब होगा।(X 2)
Bhajan Potli
ये सोच ले अभी तू...2, फिर वक्त ये न आना।।
बरसों की...   कुछ पल की जिंदगानी....

कोई नहीं है तेरा, क्यों करता मेरा-मेरा,
खुल जाए नींद जब भी, समझो वही सवेरा।(X 2)
हर भोर की किरण संग...2, हरि का भजन तू गाना।।
बरसों की...   कुछ पल की जिंदगानी

श्रेणी:

विविध भजन

स्वर:

BRIJVASI Dewakar Sharma ji

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